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गर्मियों में पशुओं को खिलाएं यह खास चॉकलेट, नहीं पड़ेगी चारा की जरूरत और दुग्ध उत्पादन क्षमता में होगी बढ़ोतरी

हरे चारे की कमी की वजह से गर्मियों के मौसम में किसान पशुओं को सूखा भूसा खिलाते हैं. इसमें न तो प्रोटिन होता है और न ही खनिज की मात्रा. वहीं यह आसानी से पचता भी नहीं है. यहीं वजह है कि गर्मी के मौसम में पशु कमजोर हो जाते हैं और दूध भी कम देने लगते हैं.

गर्मियों में हरे चारा की कमी की वजह से पशुओं में प्रोटिन और खनिज की कमी हो जाती है. इसका असर उनके दुग्ध उत्पादन क्षमता पर तो पड़ता ही है, साथ ही साथ स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. यहां तक की मादा पशु बांझपन का भी शिकार हो जाती हैं. हरे चारे की कमी की वजह से गर्मियों के मौसम में किसान पशुओं को सूखा भूसा खिलाते हैं. इसमें न तो प्रोटिन होता है और न ही खनिज की मात्रा. वहीं यह आसानी से पचता भी नहीं है.

यहीं वजह है कि गर्मी के मौसम में पशु कमजोर हो जाते हैं और दूध भी कम देने लगते हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एक खास चॉकलेट विकसित की है. हालांकि यह इंसानों के खाने वाली चॉकलेट नहीं है. यह खास चॉकलेट हरे चारे की कमी की वजह से पशुओं को होने वाली समस्याओं का समाधान है.

दो तरह से बनती है यह चॉकलेट यह चॉकलेट गुड़, यूरिया, चोकर और कैल्शियम ऑक्साइड से बनी है. इसमें प्रोटिन और मिनरल होते हैं. पशुओं को यह चॉकलेट खिलाने से उनकी पाचनशक्ति अच्छी हो जाती है और भूसे की उपयोगिता भी बढ़ जाती है. पशु चॉकलेट को दो विधि से तैयार किया जाता है. एक है हॉट विधि और दूसरा कोल्ड विधि.

हॉट विधि का उपयोग सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. इसमें 55 फीसदी गुड़ को 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म करके 7.5 फीसदी यूरिया का घोल मिला देते हैं. इसके बाद इसमें 10 फीसदी कैल्शियम ऑक्साइड, 22.5 फीसदी चोकर और 5 फीसदी नमक मिलाते हैं. ठंडी होने पर यह ठोस हो जाती है. हॉट विधि से चॉकलेट जल्द तैयार हो जाती है और इसे ज्यादा दिन तक रखा जा सकता है.

दुग्ध उत्पादन क्षमता में होती है 14 फीसदी बढ़ोतरी कोल्ड विधि में 50 फीसदी गुड़, 10 फीसदी यूरिया, 5 फीसदी नमक, 10 फीसदी कैल्शियम ऑक्साइड और 25 फीसदी चोकर को मिलाकर एक सांचे में रखकर दबाते हैं. 15 दिनों बाद सांचे से निकालकर इशे 2 दिनों तक धूप में सुखाते हैं.

अगर आप सोच रहे होंगे कि गर्मियों में पशुओं को सिर्फ चॉकलेट ही खिलाना है तो आप गलता हैं. इसके साथ चार-पांच किलो भूसा देना जरूरी है. ऐसा नहीं करने पर यूरिया जहरीला हो जाएगा. चॉकलेट भूसे को पचाने में भी मदद करती है और पशुओं की खुराक में 25 से 30 फीसदी की वृद्धि कर देती है. चॉकलेट खिलाने से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में 14 फीसदी और वसा में 11 फीसदी की वृद्धि हो जाती है.

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