उत्तर प्रदेश के हाथरस में वाल्मीकि समाज की एक युवती के साथ हुई हैवानियत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बता दें कि शुरु से ही इस मामले को आज़ाद समाज पार्टी के नेता द्वारा उठाया जा रहा है। अब चंद्रशेखर ने एलान किया है कि वे रविवार को अलीगढ़ जाएंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के डीजीपी से मांग की है कि इस मामले के आरोपियों पर रासुका लगाई जाए। चंद्रशेखर ने कहा कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ मुआवजा दिया जाए, साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार को पीड़ित परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।
चंद्रशेखर ने कहा कि हाथरस की पीड़िता बहन से मिलने एवं उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए कल मैं अलीगढ़ पहुंच रहा हूँ। डीजीपी महोदय बताएं कि अभी तक सभी दरिंदो की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। इन दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो एवं उनपर रासुका के तहत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हाथरस में वाल्मीकि समुदाय की बहन के साथ दरिंदे बेहद बर्बरता से गैंगरेप करते हैं और उसके रीढ़ एवं गले पर घातक हमला किए हैं। हड्डी टूट गई है। हालत बहुत ही नाजुक है। भीम आर्मी/ASP की टीम हॉस्पिटल में पीड़िता से मुलाकात की। सर्वप्रथम पीड़िता का सही सुचारू इलाज सुनिश्चित की जाए।
आज़ाद समाज पार्टी के नेता ने कहा कि सरकार इन सभी जातिवादी दरिंदों पर संबंधित धाराओं के साथ रासुका के तहत कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो। पीड़िता के परिवार को 01 करोड़ की आर्थिक मदद एवं एक सरकारी नौकरी सुनिश्चित की जाए ताकि वह पीड़िता की सही देखभाल कर सकें। इस बर्बर अपराध की कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
मथुरा में हुए इस जघन्य अपराध पर आज़ाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने ट्वीट किया था, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आया। बता दें कि चंद्रशेखर ने कई वर्षों से आरोप लगाते आ रहे हैं कि भाजपा सरकार में दलित उत्पीड़न चरम पर है। चंद्रशेखर का उदय भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दलित उत्पीड़न की घटनाओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के रूप में हुआ था।.
चंद्रशेखर ने कहा कि किसान देश की रीढ़ है। किसान विरोधी विधेयकों के खिलाफ पूरे देश का किसान सड़कों पर है। पुलिस प्रशासन से अपील है कि किसानों के आंदोलन में उनका सहयोग करें, आखिर हम सब भी तो किसानों की ही संतान है। उनकी पीड़ा को समझिए। आज जरूरी है कि पूरे देश को किसानों के साथ खड़ा हो जाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि बहुमत के अहंकार में भाजपा द्वारा जबरन पारित तीनों कृषि विधेयक सिर्फ किसान विरोधी ही नहीं बल्कि देश के हर तबके का विरोधी है। जब दाम पूंजीपति तय करेंगे तो महंगाई का बोझ सभी पर बढ़ेगा। समय की मांग है कि देश को अमीरों की गुलामी से बचाने के लिये हम सब किसान आंदोलन के साथ खड़े हो जाएं।