दिल्ली कांग्रेस में शीला बनाम माकन का झगड़ा अब गांधी परिवार के दरबार में पहुंच गया है. एमसीडी चुनावों में हार के बाद शीला ने अजय माकन का इस्तीफा मांगा था, माकन ने इस्तीफा दे भी दिया था, लेकिन अब तक उस पर कोई फैसला नहीं हुआ, बल्कि फैसला होने तक माकन को काम करते रहने को कहा गया.
ऐसे में हाल में शीला के नेतृत्व में दिल्ली के तक़रीबन एक दर्जन पार्टी नेताओं की बैठक राज्य सभा सांसद कपिल सिब्बल के घर पर हुई. बैठक में सभी नेताओं ने माकन की कार्यशैली पर सवाल उठाये. सभी नेताओं ने एक मेमोरेंडम भी तैयार किया और सभी ने इसको राहुल को सौंप दिया. शीला समेत इन नेताओं ने सोनिया से भी मिलने का समय मांगा है.
अजय माकन के खिलाफ पार्टी के इस अंदरूनी मोर्चे ने अपने मेमोरेंडम में अजय माकन का इस्तीफा तो नहीं मांगा है, लेकिन यह साफ़ कहा है कि वो पार्टी के नेताओं को साथ लेकर नहीं चल रहे. इन नेताओं का तर्क है कि माकन को फ्री हैंड दिया गया, उन्होंने अपने हिसाब से टिकट बांटे, लेकिन फिर भी पार्टी बुरी तरह हारी. यही नहीं, कई नेता अजय माकन पर आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ के चले गए. आरोप ये भी है कि माकन ने अकेले ही हर रणनीति बनाई और सीनियर पार्टी नेताओं की कोई पूछ नहीं है. शीला ने तो एमसीडी की हार के बाद अजय माकन का इस्तीफा मांगा था
कपिल सिब्बल के घर बैठक
कपिल सिब्बल के घर हुई बैठक में शीला दीक्षित, रमाकांत गोस्वामी, हारून युसूफ, राजकुमार चौहान और खुद सिब्बल समेत करीब एक दर्जन नेता शामिल थे, जबकि स्वास्थ्य ठीक ना होने के चलते ए के वालिया और मंगतराम सिंघल ने अपनी लिखित सहमति भेज दी. इन नेताओं की मांग है कि, दिल्ली में ऐसा नेता हो जो अगले विधानसभा चुनाव से पहले सभी को साथ लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी को मज़बूत टक्कर दे. इस समय पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है क्योंकि, इस समय दिल्ली में पार्टी डेड सी हो गयी है. इन नेताओं ने अपना मेमोरेंडम राहुल को सौंपा, तो बाद में शीला दीक्षित ने व्यक्तिगत तौर पर भी राहुल से मिलकर अजय माकन की शिकायत की है और प्रदेश कांग्रेस को दुर्दशा से निकालने की गुजारिश की.
सूत्रों के मुताबिक, अजय माकन ने राहुल को बताया था कि, एमसीडी चुनाव और राजौरी गार्डन विधानसभा के उपचुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ा है. इसलिए शीला ने खासतौर शीला ने राहुल से मुलाकात में माकन के इस दावे को ये कहकर खारिज़ करने की कोशिश की कि, राजनितिक दल चुनाव जीतने और सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ते हैं न की वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए. ऐसे में देश की सबसे बड़ी पार्टी अगर मत प्रतिशत बढ़ने की बात से खुश होगी तो ये दुर्भाग्य है.
हालांकि, इस मुद्दे पर शीला दीक्षित ने कोई भी बात करने से इनकार कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, माकन विरोधी खेमे के नेताओं ने तय किया है कि, चूंकि अभी वो आलाकमान से बात कर रहे हैं, इसलिए मीडिया से इस बारे में कोई चर्चा नहीं करेंगे.
कुल मिलाकर भले ही दिल्ली में कांग्रेस तीसरे नम्बर की पार्टी बनी हुई है, लेकिन शीला बनाम माकन की लड़ाई थमने के बजाय बढ़ती जा रही है. ऐसे में दिल्ली में वापसी का कांग्रेस का ख्वाब अभी तो दूर की कौड़ी ही दिख रहा है.