अखिलेश यादव ने बीजेपी एमपी सुब्रत पाठक पर कहा – मुंह में खैनी भर लेंगे तो विकास कैसे करेंगे? जवाब मिला – वोदका पीना छोड़ दें वो, आए ऐसे कमेंट्स इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक पर कटाक्ष किया तो उन्होंने ट्वीट के जरिए पलटवार किया। समाजवादी पार्टी के मुखिया उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादवऔर कन्नौज से बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। इन दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं। अखिलेश ने बीजेपी सांसद को पान खाने की सलाह दी तो सुब्रत पाठक ने ट्वीट के जरिए उन्हें वोदका छोड़ देने की सलाह दी। इन दोनों के बीच हुई जुबानी जंग पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी कमेंट किए।
पान का प्रयोग हम हिंदुओं की पूजा में होता है @yadavakhilesh जी और इसमें सुपारी कत्था लौंग इलायची और कन्नौज के पवित्र फूलों के इत्र पड़ते हैं अच्छा हो आप वोदका पीना छोड़ दें ताकी आपकी बुद्धि ठीक रहे निजी जीवन के आपके बहुत से किस्से कन्नौज में आज भी हैं हैलो कानपुर अखबार भूल गये ?
— Subrat Pathak (@SubratPathak12) December 9, 2022
मैनपुरी उपचुनाव के नतीजे आने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने सुब्रत पाठक पर कहा, वह मुंह में खैनी भरे रहते हैं। उन्हें खैनी खाना छोड़ देना चाहिए। इसके साथ उन्होंने कहा कि वह सांसद होते हुए कन्नौज का विकास नहीं करना चाहते हैं, मुंह में मसाला भर लेंगे तो विकास की बात क्या करेंगे? सपा प्रमुख ने चुटकी लेते हुए कहा कि सुब्रत पाठक की बहुत रिश्तेदारी है इटावा में, रिश्तेदार भी जानते होंगे कि सपा ने वहां कितना विकास कराया है।.
अखिलेश यादव के बयान पर सुब्रत पाठक ने ट्वीट के जरिए पलटवार किया। उन्होंने लिखा, पान का प्रयोग हिंदुओं की पूजा में होता है। इसमें सुपारी, कत्था, इलायची और कन्नौज के पवित्र फूलों के इत्र पड़े होते हैं। अच्छा हो कि अखिलेश यादव वोदका पीना छोड़ दें ताकि उनकी बुद्धि ठीक रहे। अखिलेश के जीवन के बहुत से किस्से कन्नौज में आज भी लोगों को मालूम हैं। अखिलेश यादव और सुब्रत पाठक के बयान पर को सोशल मीडिया यूजर्स चुटकी लेते हुए कमेंट कर रहे हैं तो वही कुछ लोगों ने अपने – अपने नेताओं के समर्थन में प्रतिक्रिया दी है। विनीत सिंह चौहान नाम के ट्विटर यूजर ने कमेंट किया कि एक चुने हुए सांसद के लिए अखिलेश यादव की ऐसी भाषा बिल्कुल भी सही नहीं है लेकिन राजपाट चला गया है, उसके बाद भी अहंकार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शरद यादव नाम के एक यूजर ने लिखा, “विकास और रोजगार पर ध्यान देने के बजाय नेता एक दूसरे पर निजी हमला कर रहे, ऐसे यूपी का भविष्य बेहतर बना पाएंगे?