चीन के साथ होने जा रही 400 अरब डॉलर के बाद ईरान एक के बाद एक भारत विरोधी फैसले ले रहा है। हाल ही में ईरान ने भारत को बड़ा झटका देते हुए चाबहार रेल परियोजना से अलग कर दिया। अब उसने गैस फील्ड फारजाद-बी ब्लॉक के डिवेलपमेंट पर अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला लिया है।
देश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि ईरान ने भारत को सूचित किया है कि वह फिलहाल गैस फील्ड को अकेले ही विकसित करने जा रहा है। ईरान ने कहा है कि भारत इस परियोजना में बाद में शामिल हो सकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, फरजाद-बी गैस फील्ड समझौते को लेकर भी कई खबरें चल रही हैं। इसमें एक्सप्लोरेशन स्टेज में भारत की ओएनजीसी (ऑयल एंड नैचुरेल गैस कॉर्पोरेशन) कंपनी भी शामिल थी। हालांकि, ईरान की तरफ से नीतिगत बदलाव के चलते द्विपक्षीय सहयोग पर असर पड़ा है। जनवरी 2020 में हमें बताया गया था कि भविष्य में ईरान अपने आप इस गैसफील्ड का विकास करेगा और वह बाद के चरण में भारत की मौजूदगी चाहता है। इस मामले पर चर्चा जारी है।
बता दें कि भारत साल 2009 से ही गैस फील्ड का कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए कोशिशें कर रहा था। फरजाद-बी ब्लॉक में 21.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट का गैस भंडार है। पीएम नरेंद्र मोदी ने 2016 में ईरान के दौरे पर गए थे। 15 साल बाद भारत के किसी पीएम का यह ईरान दौरा था। इस दौरान पीएम मोदी ने मिलियन डॉलर के निवेश से ईरान में चाबहार पोर्ट स्थापित करने का करार किया था.
इसके अलावा चाबहार से अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर ज़ाहेदान तक रेल लाइन बिछाने को लेकर भी समझौता हुआ था। इस पूरी परियोजना को मार्च 2022 तक पूरा किया जाना था। लेकिन पिछले सप्ताह ईरान के ट्रांसपोर्ट और शहरी विकास मंत्री मोहम्मद इस्लामी ने 628 किमी लंबे रेलवे ट्रैक को बनाने का उद्धाटन किया। ईरान के रेलवे ने कहा है कि वह बिना भारत की मदद के ही इस परियोजना पर आगे बढ़ेगा। इसके लिए वह ईरान के नैशनल डिवेलपमेंट फंड 40 करोड़ डॉलर की धनराशि का इस्तेमाल करेगा।